अनदेखी पांच हजार दिव्यांग विधार्थी, शिक्षक महज 20 प्रदेश में 87 हजार विधार्थियों को पढ़ा रहे 200 विशेष शिक्षक

सवाईमाधोपुर जिले में सालों से विशेष शिक्षकों की नहीं भर्ती विशेष योग्यजन को सरकार ने केवल दिव्यांग कहकर ही खुश कर दिया। दूसरी और उनकी पढ़ाई व् जीवनयापन के इंतजाम करना भूल गई। प्रदेश के विभित्र सरकारी स्कूल में 87 हजार से अधिक दिव्यांग छात्र-छात्राएं पढ़ रहे है। इनके लिए शिक्षा विभाग की और से महज 200 विशेष शिक्षक नियुक्त है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा निति के अनुसार 87 हजार छात्रों के लिए 10 हजार से अधिक शिक्षकों की आवश्यकता है। हालात यह है की प्रदेश के कई विशेष स्कूलों में सामान्य शिक्षक ही पढ़ा रहे है।

अनदेखी पांच हजार दिव्यांग विधार्थी, शिक्षक महज 20 प्रदेश में 87 हजार विधार्थियों को पढ़ा रहे 200 विशेष शिक्षक

सवाईमाधोपुर जिले की स्थिति शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में करीब दिव्यांग विधार्थी है। करीब 5 हजार दिव्यांग विधार्थी है। इनको पढ़ाने के लिए महज 20 ही विशेष सरकारी शिक्षक नियुक्त है, जबकि नियमानुसार शिक्षकों की यह संख्या दिव्यांग विधार्थियों के अनुपात में काफी कम है। इससे पढ़ाई बाधित होना स्वाभाविक है। इस और सरकार गंभीर नहीं लगती।
10 छात्रों पर एक शिक्षक जरूरी

राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 के अनुसार विशेष विधालयों में 10 छात्रों पर एक होना चाहिए, जबकि विमंदित विधालयों में छह छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था जरूरी है। इस और राज्य सरकार को व्यवस्था करना चाहिए। सूत्रों की मानें तो विशेष शिक्षकों का ही टोटा है। ऐसे में दिव्यांगों को पढ़ाने वाले शिक्षक कहां से लाए। विशेष शिक्षकों का प्रशिक्षण कठिन होता है ऐसे में कोई ऐसा शिक्षक बनना कम ही पसंद कर रहे है।

614 विशेष शिक्षक

वर्तमान में प्रदेश में केवल 614 विशेष शिक्षक है। इनमे से 243 शिक्षक सर्व शिक्षा अभियान में प्रतिनियुक्ति के तहत स्कूलो में पढ़ा रहे है, जबकि 207 शिक्षक तहसील व् ब्लॉक स्तर पर लगे हुए है। बीकानेर बांसवाड़ा व जयपुर में मूक -बधिर बच्चों के लिए विधालय है। वहीं दृष्टिबाधित बच्चों के लिए अजमेर, जयपुर, बीकानेर में बड़े स्कूल है। सवाईमाधोपुर जिले में दिव्यांगों के लिए कोई विशेष स्कूल नहीं खोला गया है।
सवाईमाधोपुर जिले में दिव्यांगों के लिए 20 से अधिक विशेष शिक्षक है। हालांकि पिछले कई सालो से विशेष शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई है। ऐसे में शिक्षकों की संख्या कम होना स्वाभाविक है। राधेश्याम मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक।

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